क्या आपको पता है कि ‘पुलिस’ की वर्दी का रंग ‘खाकी’ क्यों होता है…

‘पुलिस’ की वर्दी का रंग ‘खाकी’ क्यों होता है : –

प्रत्येक देश में एक कानूनी व्यवस्था को बनाने के लिए पुलिस बल बनाया जाता है। दुनिया के सभी देशो की अपनी एक पुलिस बल है और हर देश की पुलिस के पास अलग-अलग रंगों के अपने कपड़े भी होते हैं। जिसे हम लोग वर्दी कहते हैं लेकिन क्या
आप यह जानते हैं कि भारत में पुलिस की वर्दी को खाकी क्यों कहते है?  और उसका रंग क्यों खाकी है? आज हम आपको बताते है कि आखिर इसके पीछे का कारण क्या है।

पुलिस हमारे लिए दिन रात यहां तक कि त्योहारों के समय भी तैनात रहती है, पुलिस है तो हम सुरक्षित हैं ! पुलिस की एक ख़ास पहचान होती हैं इनकी वर्दी जो खाकी रंग की होती है वो दूर से देखने पर भी पहचान में आ जाते हैं ! कुछ राज्यों में खाकी से थोड़ा हल्का या गहरा रंग की भी वर्दी होती है लेकिन वो भी खाकी से मिलती जुलती ही होती हैं ! लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है की हमारे भारत की सभी पुलिस की वर्दी खाकी ही क्यों होती है कोई दूसरे रंग की क्यों नहीं ?

यहाँ हम आपको ये भी बता दें कि हर सुरक्षा बल की वर्दी के पीछे एक ख़ास महत्व होता है। पुलिस की वर्दी को ‘खाकी’ भी कहा जाता है और खाकी वर्ड का हिंदी में अर्थ होता है ‘मिटटी’ इसीलिए ये खाकी रंग की वर्दी हमेशा ही उसे यह याद दिलाती रहती है की उसने ये खाकी वर्दी अपने देश की मिटटी की सुरक्षा यानि कि देश की सामाजिक व्यवस्था की सुरक्षा के लिए पहनी हुई है।

दरअसल इसके पीछे भी एक कहानी है जिस कारण पुलिस की वर्दी का रंग खाकी चुना गया और जो आज तक चलता आ रहा है, आइये आपको भी बताते हैं वो सच ! वर्ष 1907 से पहले जब भारत पर ब्रिटिश सरकार की हुकूमत थी और पुलिस प्रसाशन भी ब्रिटिश ही हुआ करता था, उस समय वर्दी का रंग सफ़ेद हुआ करता था लेकिन उनकी वर्दी सफ़ेद होने के कारण जल्दी गन्दी नजर आती थी और इस समस्या के निवारण के लिए ब्रिटिश सैनिक अपनी वर्दी को अलग अलग रंग में रंगते थे ताकि गंदगी ना दिखे ! 1907 में अंग्रेजी सरकार ने भारतीय पुलिस का गठन किया था !

पुलिस की नौकरी करते समय उन्हें ये कसम दिलाई जाती है कि वो देश के हितों के लिए हर दशा मे सुरक्षा करेंगे और वह सभी
जाति व धर्म से ऊपर उठ कर न्याय का सम्मान करेंगे।यह खाकी रंग उन्हें हमेशा ही इस देश की मिटटी से जुड़े रहने का एहसास भी दिलाता रहता है। और साथ ही साथ इसके पीछे का जो इतिहास है वो भी हम आपको बता देते है सन 1800 के बीच में, भारत पर ब्रिटिश राज हुआ करता था और तब की पुलिस की वर्दी का रंग सफ़ेद हुआ करता था जो कि भारत में भ्रमण के दौरान धुल-मिटटी से बहुत ज़्यादा जल्दी खराब हो जाती थी।

तब उन लोगो को बहुत ज़्यादा मुश्किल हालात का सामना करना पड़ता था। 1847 में, सर हैरी बर्नेट लम्सडेन ने पहली आधिकारिक खाकी वर्दी को सबके सामने प्रस्तुत किया और कहा की ये खाकी रंग धुल व मिटटी में खराब भी  नहीं होता है और फिर इसे पुलिस की वर्दी के लिए अपना लिया गया। इसी तरह से अलग-अलग देशों में पुलिस की वर्दी का अपना अलग इतिहास है और अपनी भिन्न- भिन्न प्राथमिकता है।

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